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Lesson- 24 श्री शनि चालीसा

Lesson- 24 श्री शनि चालीसा

01श्री शनि चालीसा

हिंदू धर्म में शनि देव को दंडाधिकारी माना गया है।सूर्यपुत्र शनिदेव के बारे में लोगों के बीच कई मिथ्य हैं।लेकिन मान्यता है कि भगवान शनिदेव जातकों केकेवल उसके अच्छे और बुरे कर्मों का ही फल देते हैं।शनि देव की पूजा अर्चना करने से जातक के जीवनकी कठिनाइयां दूर होती है। शिव पुराण में वर्णित हैकि अयोध्या के राजा दशरथ ने शनिदेव को "शनिचालीसा" से प्रसन्न किया था। शनि चालीसा निम्न है।शनि साढ़ेसाती और शनि महादशा के दौरानज्योतिषी शनि चालीसा का पाठ करने की सलाह देतेहैं।

श्री शनि चालीसा

॥दोहा॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

हे माता पार्वती के पुत्र भगवान श्री गणेश, आपकी जयहो। आप कल्याणकारी है, सब पर कृपा करने वाले हैं,दीन लोगों के दुख दुर कर उन्हें खुशहाल करें भगवन।हे भगवान श्री शनिदेव जी आपकी जय हो, हे प्रभु,हमारी प्रार्थना सुनें, हे रविपुत्र हम पर कृपा करें वभक्तजनों की लाज रखें।


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Lesson- 24 श्री शनि चालीसा
02. जैसी करनी वैसी भरनी - कर्म भोग ..!!!

Lesson- 23 श्री लक्ष्मी चालीसा

Lesson- 23 श्री लक्ष्मी चालीसा
1- श्री लक्ष्मी चालीसा
देवी लक्ष्मी जी को धन, समृद्धि और वैभव की देवी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि लक्ष्मी जी की नित्य पूजा करने से मनुष्य के जीवन में कभी दरिद्रता नहीं आती है। लक्ष्मी जी की पूजा में कई मंत्रों का प्रयोग होता है। माता की आराधना में चालीसा का भी विशेष महत्व है।

श्री लक्ष्मी चालीसा
॥दोहा॥
मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध करि, परुवहु मेरी आस॥

हे मां लक्ष्मी दया करके मेरे हृद्य में वास करो हे मां मेरी मनोकामनाओं को सिद्ध कर मेरी आशाओं को पूर्ण करो।

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Lesson- 23 श्री लक्ष्मी चालीसा
2- बोधकथा - निंदा

विडियो....
https://www.youtube.com/watch?v=EIvLUk4apQ0

Lesson - 22 देवगुरु बृहस्पति

Lesson - 22 देवगुरु बृहस्पति
1- देवगुरु बृहस्पति
बृहस्पति का अनेक जगह उल्लेख मिलता है। ये एक तपस्वी ऋषि थे। इन्हें 'तीक्ष्णशृंग' भी कहा गया है। धनुष बाण और सोने का परशु इनके हथियार थे और ताम्र रंग के घोड़े इनके रथ में जोते जाते थे। बृहस्पति का अत्यंत पराक्रमी बताया जाता है। इन्द्र को पराजित कर इन्होंने उनसे गायों को छुड़ाया था। युद्ध में अजय होने के कारण योद्धा लोग इनकी प्रार्थना करते थे। ये अत्यंत परोपकारी थे जो शुद्धाचारणवाले व्यक्ति को संकटों से छुड़ाते थे। इन्हें गृहपुरोहित भी कहा गया है, इनके बिना यज्ञयाग सफल नहीं होते।

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Lesson - 22 देवगुरु बृहस्पति
2- बोधकथा


विडियो....

https://youtu.be/9mRXx_sCgBE

https://youtu.be/fnGenEEPiWc

Lesson - 21 श्रीगणेश चालीसा

Lesson - 21 श्रीगणेश चालीसा
1- श्रीगणेश चालीसा
गणेश चालीसा सर्वप्रथम पूजनीय भगवान श्रीगणेश की कृपा पाने का एक माध्यम या एक ऐसा मार्ग है, जो किसी भी कार्य को पूर्ण करने में सहायक है। यदि सुबह सुवेरे नियमित रुप से गणेश चालीसा का पाठ किया जाए तो घर में खुशहाली रहती है. घर-परिवार में सुविधा-संपन्नता बनी रहती है. इस पाठ के करने से परिवार में बरकत बनी रहती है. आइए गणेश चालीसा का पाठ आरंभ करें.

॥दोहा॥
जय गणपति सदगुणसदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥
[हे सद्गुणों के सदन भगवान श्री गणेश आपकी जय हो, कवि भी आपको कृपालु बताते हैं। आप कष्टों का हरण कर सबका कल्याण करते हो, माता पार्वती के लाडले श्री गणेश जी महाराज आपकी जय हो।]

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Lesson - 21 श्रीगणेश चालीसा
2- बोधकथा- तीन गुरु

विडियो...
https://www.youtube.com/watch?v=gdxCokHp24Q

Lesson 20 हनुमानाष्टक

Lesson 20 हनुमानाष्टक
1- हनुमानाष्टक
हिन्दू मान्यता अनुसार हनुमान जी की उपासन संकट, दुःख, तकलीफ से दूर करती हैं . कहते हैं बाल्यकाल में श्री हनुमान जी ने सूर्य देवता को फल समझ निगल लिया था फिट देवताओं ने उनसे प्रार्थना कर उनसे सूर्य को छोड़ने का आग्रह किया .
हनुमान जी को तीनो त्रिकाल स्वामियों से वरदान प्राप्त था . पवन देवता एवम अंजनी के पुत्र हनुमान ने एपीआई शरारतों से सभी लोगो को परेशान कर दिया था . उस वक्त इनकी शक्ति के दुरूपयोग पर अंकुश लगाने हेतु इन्हें श्राप दिया गया कि जब तक हनुमान जी को उनकी शक्ति याद नहीं दिलाई जायेगी तब तक उन्हें उसका भान नहीं होगा . इसलिए ही सीता मैया की खोज के समय जामवंत ने हनुमान को उनकी शक्ति याद दिलाई थी जिसके बाद वे समुद्र पार जा कर सीता मैया की खबर लाये .
इसी कहानी को ध्यान में रखते हुए कहा जाता हैं कि हनुमान जी की प्रार्थना करते वक्त उन्हें अपने दिल की बात बार- बार कहनी चाहिये क्यूंकि वे भूल जाते हैं .

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Lesson 20 हनुमानाष्टक
2- बोधकथा- गुब्बारे

विडियो....
https://www.youtube.com/watch?v=fbgDUYPF5Fk

Lesson 19 श्री रुद्राष्टकम्

Lesson 19 श्री रुद्राष्टकम्
1- श्री रुद्राष्टकम्
श्री रुद्राष्टकम् (संस्कृत:श्री रुद्राष्टकम्) स्तोत्र महाज्ञानी लंकेश रावण या दशानन द्वारा भगवान् शिव की स्तुति हेतु रचित एवं प्रथम गायित है। इसका उल्लेख श्री रामचरितमानस के उत्तर कांड में आता है। यह जगती छंद में लिखा गया है |

श्री रुद्राष्टकम्
शिव को समर्पित यह स्तोत्र तुलसीदास की रामचरितमानस से लिया गया है।
॥ अथ रुद्राष्टकम् ॥
नमामीशमीशान निर्वाणरूपम्।
विभुम् व्यापकम् ब्रह्मवेदस्वरूपम्।

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Lesson 19 श्री रुद्राष्टकम्
2- बोधकथा- संगठन में शक्ति है


Lesson -18 संस्कृति बोध

Lesson -18 संस्कृति बोध
1- प्रातः स्मरणीय व कल्याणकारी छः मन्त्र
भारतीय संस्कृति एक महान संस्कृति है, इसमें न केवल जन्म से मृत्यु तक बल्कि दिन के प्रारम्भ से लेकर अंत तक की भी, महत्वपूर्ण एवं सुन्दर प्रार्थनाओं का समावेश किया गया है। मैं इनमें से दिन के प्रारम्भ की प्रार्थनों को आपके सम्मुख लेकर आया हूं, इस आशा के साथ कि ये प्रार्थनाएं निश्चित ही आपकी शारीरिक-मानसिक-धार्मिक उन्नति में सहायक होगी।
प्रातःकाल उठते ही अपने दोनों हाथों को आपस में रगड़े तत्पश्चात अपने हाथों का दर्शन करते हुए, निम्न श्लोक को दोहरायें-
लक्ष्मी-सरस्वती-भगवान नारायण प्रार्थना मन्त्र-
काराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्।।1।।
2- बोधकथा -स्वर्ग के दर्शन


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Lesson -18 संस्कृति बोध
2- बोधकथा -स्वर्ग के दर्शन

https://youtu.be/g5nD0PBc4-Y

Lesson- 17 हिन्दू-धर्म

Lesson- 17 हिन्दू-धर्म
1-हिन्दू-धर्म
हिन्दू-धर्म
हिन्दू-कौन?—
गोषु भक्तिर्भवेद्यस्य प्रणवे च दृढ़ा मतिः। पुनर्जन्मनि विश्वासः स वै हिन्दुरिति स्मृतः।।
अर्थात-- गोमाता में जिसकी भक्ति हो, प्रणव जिसका पूज्य मन्त्र हो, पुनर्जन्म में जिसका विश्वास हो--वही हिन्दू है।
मेरुतन्त्र ३३ प्रकरण के अनुसार ' हीनं दूषयति स हिन्दु ' अर्थात जो हीन (हीनता या नीचता) को दूषित समझता है (उसका त्याग करता है) वह हिन्दु है।
लोकमान्य तिलक के अनुसार-
असिन्धोः सिन्धुपर्यन्ता यस्य भारतभूमिका। पितृभूः पुण्यभूश्चैव स वै हिन्दुरिति स्मृतः।। अर्थात्- सिन्धु नदी के उद्गम-स्थान से लेकर सिन्धु (हिन्द महासागर) तक सम्पूर्ण भारत भूमि जिसकी पितृभू (अथवा मातृ भूमि) तथा पुण्यभू (पवित्र भूमि) है, (और उसका धर्म हिन्दुत्व है) वह हिन्दु कहलाता है।

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Lesson- 17 हिन्दू-धर्म
2- बोधकथा - वीर बालक

Lesson 16 गायत्री महामंत्र

Lesson 16 गायत्री महामंत्र
1-गायत्री महामंत्र
वेदों का एक महत्त्वपूर्ण मंत्र है जिसकी महत्ता ॐ के लगभग बराबर मानी जाती है। यह यजुर्वेद के मंत्र ॐ भूर्भुवः स्वः और ऋग्वेद के छंद 3.62.10 के मेल से बना है। इस मंत्र में सवित्र देव की उपासना है इसलिए इसे सावित्री भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र के उच्चारण और इसे समझने से ईश्वर की प्राप्ति होती है। इसे श्री गायत्री देवी के स्त्री रुप मे भी पुजा जाता है।

2- बोधकथा -आरुणी का साहस


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Lesson 16 गायत्री महामंत्र
2- बोधकथा -आरुणी का साहस

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https://www.youtube.com/watch?v=NTosNzlaVcY

Lesson 15 सूर्य नमस्कार

Lesson 15 सूर्य नमस्कार
1- सूर्य नमस्कार
हमे एक अच्छे दिन की शुरुआत के लिये प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व जागकर उगते सूर्य को नमस्कार करना चाहिये । उगते हुए सूर्य को बाल सूर्य कहते है । यदि हम बाल सूर्य के समक्ष दोनो आखें बंदकर हाथ जोडकर खडे हो जाये, तो सूर्य की पहली किरण हमारे शरीर को जब स्पर्श करती है, तब हमे एक नई ऊर्जा, एक नई शक्ति मिलती है और यह शक्ति शरीर को एक स्फुर्ति प्रदान करती है, हमारे अन्दर सोई हुइ शक्ति को जगाती है । संसार में बहुत सारी प्राकृतिक चीजे है,जैसे :– हवा, पानी, आकाश, पृथ्वी, पेड, पौधे, सूर्य,चन्द्रमा आदि ।इन सभी प्राकृतिक वस्तुओ का हमारे शरीर पर, मन पर पूर्ण प्रभाव पड़ता है, यदि हम प्रातः काल किसी बगीचे में भ्रमण करते है तो वहाँ की हरियाली को देखकर मन को प्रसन्नता मिलती है । आँखों को ठंडक मिलती है ,तथा नंगे पैर घास पर चलने से आँखों की ज्योति बढती है । शुद्ध हवा शरीर तथा मन को प्रफुल्लित करती है ।

२- बोधकथा - वीर बालक प्रल्हाद


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Lesson 15 सूर्य नमस्कार
२- बोधकथा - वीर बालक प्रल्हाद

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https://www.youtube.com/watch?v=gp0DeCPd4Zs

Lesson 14 ‘ॐ’ शब्द की महत्ता

Lesson 14 ‘ॐ’ शब्द की महत्ता
1- ‘ॐ’ शब्द की महत्ता
‘ॐ’ शब्द का उच्चारण अपने आपमें महत्व रखता हैं । सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड एक ‘शून्य’ की तरह हैं । इसमें बहुत सारी शक्तियाँ विद्यमान हैं । ये शक्तियाँ किसी न किसी रुप में हमारे शरीर को तथा हमारे मन को प्रभावित करती हैं । हमारे अन्दर भी कुछ शक्तियाँ एसी होती है ‘जो सुप्तावस्था मे है’ उन्हें जाग्रत करना पड़ता हैं । उनको जाग्रत करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती हैं । यह ऊर्जा हमें स्वयं उत्पन्न करना पड़्ती हैं ।

2- बोधकथा -वीर बालक ध्रुव

नोट- आज से संस्कृति बोध के अध्याय छोटे छोटे स्वरुप में देंगे ... जिससे गणित विषय पर ध्यान ज्यादा दे पायें..
गणित विषय की सामग्री आज से बड़ा कर दी जाएगी.. संस्कृति बोध के बड़े अध्याय कुछ अन्तराल पर पुनः शुरू होंगे.


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Lesson 14 ‘ॐ’ शब्द की महत्ता
2- बोधकथा -वीर बालक ध्रुव

विडियो देखें....
https://www.youtube.com/watch?v=AEHvUESdtnQ

Lesson - 13 श्री दुर्गा सप्तशती पाठ

Lesson - 13 श्री दुर्गा सप्तशती पाठ
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ
आप विचार कर रहे होंगे.. संस्कृति बोध के अध्याय में सप्तसती पाठ... जी हां. प्रकृति के रहस्य एवं सृष्टी की उत्पति के रहस्यों को समझना है तो शास्त्रों का सहारा लेना ही होगा.. और सप्तसती से अच्छा माध्यम कुछ हो नहीं सकता.. माना यह पूर्णतः धार्मिक ग्रन्थ है.. किन्तु भारतीय संस्कृति का बोध इसके बिना अधुरा है.. अध्ययन अवश्य कीजिये..

पहला अध्याय – Chapter First – Durga Saptashati
(महर्षि ऋषि का राजा सुरथ और समाधि को देवी की महिमा बताना)
महर्षि मार्कण्डेय बोले – सूर्य के पुत्र सावर्णि की उत्पत्ति की कथा विस्तारपूर्वक कहता हूँ सुनो, सावर्णि महामाया की कृपा से जिस प्रकार मन्वन्तर के स्वामी हुए, उसका भी हाल सुनो। पहले स्वारोचिष नामक राज्य था। वह प्रजा को अपने पुत्र के समान मानते थे तो भी कोलाविध्वंशी राजा उनके शत्रु बन गये। दुष्टों को दण्ड देने वाले राजा सुरथ की उनके साथ लड़ाई हुई, कोलाविध्वंसियों के संख्या में कम होने पर भी राजा सुरथ युद्ध में उनसे हार गए। तब वह अपने नगर में आ गये, केवल अपने देश का राज्य ही उनके पास रह गया और वह उसी देश के राजा होकर राज्य करने लगे किन्तु उनके शत्रुओं ने उन पर वहाँ आक्रमण किया।


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Lesson - 13 श्री दुर्गा सप्तशती पाठ
2- बोधकथा

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https://www.youtube.com/watch?v=kSO1UVxxdD8

Lesson 12 दुर्गा अवतार

Lesson 12 दुर्गा अवतार
1- दुर्गा
दुर्गा हिन्दुओं की प्रमुख देवी हैं जिन्हें केवल देवी और शक्ति भी कहते हैं। शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं जिनकी तुलना परम ब्रह्म से की जाती है। दुर्गा को आदि शक्ति, प्रधान प्रकृति, गुणवती माया, बुद्धितत्व की जननी तथा विकार रहित बताया गया है। वह अंधकार व अज्ञानता रुपी राक्षसों से रक्षा करने वाली तथा कल्याणकारी हैं। उनके बारे में मान्यता है कि वे शान्ति, समृद्धि तथा धर्म पर आघात करने वाली राक्षसी शक्तियों का विनाश करतीं हैं।
देवी दुर्गा का निरूपण सिंह पर सवार एक निर्भय स्त्री के रूप में की जाती है। दुर्गा देवी आठ भुजाओं से युक्त हैं जिन सभी में कोई न कोई शस्त्रास्त्र होते है। उन्होने महिषासुर नामक असुर का वध किया। महिषासुर (= महिष + असुर = भैंसा जैसा असुर) करतीं हैं। हिन्दू ग्रन्थों में वे शिव की पत्नी दुर्गा के रूप में वर्णित हैं। जिन ज्योतिर्लिंगों मैं देवी दुर्गा की स्थापना रहती है उनको सिद्धपीठ कहते है। वँहा किये गए सभी संकल्प पूर्ण होते है।

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Lesson 12 दुर्गा अवतार
2- बोधकथा- हमेशा अच्छा करो

https://youtu.be/-_0AVDbVSnI

Lesson - 11 युग

Lesson - 11 युग
1- युग
युग, हिंदु सभ्यता के अनुसार, एक निर्धारित संख्या के वर्षों की कालावधि है। ब्रम्हांड का काल चक्र चार युगों के बाद दोहराता है। हिन्दू ब्रह्माण्ड विज्ञान से हमे यह पता चलता है की हर ४.१-८.२ अरब सालों बाद ब्रम्हांड में जीवन एक बार निर्माण एवं नष्ट होता है। इस कालावधि को हम ब्रह्मा का एक पूरा दिन (रात और दिन मिलाकर) भी मानते है। ब्रह्मा का जीवनकाल ४० अरब से ३११० अरब वर्षों के बीच होता है।
काल के अंगविशेष के रूप में 'युग' शब्द का प्रयोग ऋग्वेद से ही मिलता है (दश युगे, ऋग्0 1.158.6) इस युग शब्द का परिमाण अस्पष्ट है। ज्यौतिष-पुराणादि में युग के परिमाण एवं युगधर्म आदि की सुविशद चर्चा मिलती है।
वेदांग ज्योतिष में युग का विवरण है (1,5 श्लोक)। यह युग पंचसंवत्सरात्मक है। कौटिल्य ने भी इस पंचवत्सरात्मक युग का उल्लेख किया है। महाभारत में भी यह युग स्मृत हुआ है। पर यह युग पारिभाषिक है, अर्थात् शास्त्रकारों ने शास्त्रीय व्यवहारसिद्धि के लिये इस युग की कल्पना की है।

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Lesson - 11 युग
2-बोधकथा चोट

https://youtu.be/xxlaOyA_62E

Lesson- 10 भगवान शिव के अवतार

Lesson- 10 भगवान शिव के अवतार
1- भगवान शिव के अवतार
शिव या महादेव हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण देवताओं में से एक है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव भी कहते हैं। इन्हें भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ,गंगाधार के नाम से भी जाना जाता है। तंत्र साधना में इन्हे भैरव के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से हैं। वेद में इनका नाम रुद्र है। यह व्यक्ति की चेतना के अन्तर्यामी हैं। इनकी अर्धांगिनी (शक्ति) का नाम पार्वती है। इनके पुत्र कार्तिकेय और गणेश हैं, तथा पुत्री अशोक सुंदरी हैं। शिव अधिक्तर चित्रों में योगी के रूप में देखे जाते हैं और उनकी पूजा शिवलिंग तथा मूर्ति दोनों रूपों में की जाती है। शिव के गले में नाग देवता विराजित हैं और हाथों में डमरू और त्रिशूल लिए हुए हैं। कैलाश में उनका वास है। यह शैव मत के आधार है। इस मत में शिव के साथ शक्ति सर्व रूप में पूजित है।
भगवान शिव को संहार का देवता कहा जाता है। भगवान शिव सौम्य आकृति एवं रौद्ररूप दोनों के लिए विख्यात हैं। अन्य देवों से शिव को भिन्न माना गया है। सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति शिव हैं। त्रिदेवों में भगवान शिव संहार के देवता माने गए हैं। शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदिस्रोत हैं और यह काल महाकाल ही ज्योतिषशास्त्र के आधार हैं। शिव का अर्थ यद्यपि कल्याणकारी माना गया है, लेकिन वे हमेशा लय एवं प्रलय दोनों को अपने अधीन किए हुए हैं।

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Lesson- 10 भगवान शिव के अवतार
2- बोधकथा

https://youtu.be/1JjbQqHiPbA

Lesson - 9 चौसठ कलाएँ

Lesson - 9 चौसठ कलाएँ
1- चौसठ कलाएँ
भारतीय साहित्य में कलाओं की अलग-अलग गणना दी गयी है। कामसूत्र, शुक्रनीति आदि में 64 कलाओं का वर्णन है। दण्डी ने काव्यादर्श में इनको 'कामार्थसंश्रयाः' कहा है (अर्थात् काम और अर्थ कला के ऊपर आश्रय पाते हैं।) –

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Lesson - 9 चौसठ कलाएँ
2- बोधकथा-9 विक्रम साराभाई

विडियो ..

https://youtu.be/S9s-cObCUp0

Lesson 8 भगवान विष्णु के 24 अवतार

Lesson 8 भगवान विष्णु के 24 अवतार
1-भगवान विष्णु के 24 अवतार
ऐसा कहा जाता है कि जब जब पृथ्वी पर कोई संकट आता है तो भगवान अवतार लेकर उस संकट को दूर करते है। भगवान शिव और भगवान विष्णु ने अनेको बार पृथ्वी पर अवतार लिया है। आज हम आपको भगवान विष्णु के 24 अवतारों के बारे में बताएँगे। इन में से 23 अवतार अब तक पृथ्वी पर अवतरित हो चुके है जबकि 24 वा अवतार ‘कल्कि अवतार’ के रूप में होना बाकी है। इन 24 अवतार में से 10 अवतार विष्णु जी के मुख्य अवतार माने जाते है। यह है मत्स्य अवतार, कूर्म अवतार, वराह अवतार, नृसिंह अवतार, वामन अवतार, परशुराम अवतार, राम अवतार. कृष्ण अवतार, बुद्ध अवतार, कल्कि अवतार।

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Lesson 8 भगवान विष्णु के 24 अवतार
2- बोधकथा

विडियो देखें.....

https://www.youtube.com/watch?v=JaK8xfARBVs

https://www.youtube.com/watch?v=jT22axesGn8

Lesson 7 भारत के पर्वत

Lesson 7 भारत के पर्वत
भारत में अनेक पर्वत श्रृंखलाएं हैं। पर्वत भौगोलिक विविधता के साथ-साथ अतुलनीय जैव विविधता के भी महत्वपूर्ण स्रोत हैं। भारत विश्व के 12 महा वंशाणु केन्द्र का हिस्सा तो है ही, इसके अलावा संसार के जैव विविधता के 25 महत्वपूर्ण स्थानों में से 2 अति महत्वपूर्ण स्थान भारत में ही हैं जैसे ‘पूर्वी हिमालय तथा पश्चिमी घाट’। भारत के पर्वत औषधीय पेड़-पौधों व खनिजों की असीमित मात्रा के भंडार हैं। इसके अतिरिक्त यह पर्वत देश की जलवायु को भी निर्धारित करते हैं।

भारत में उत्तरी सिरे पर दो पर्वत श्रृंखलाएं हैं, काराकोरम पर्वत श्रृंखलाएं और हिमालय। भारत के मध्य भाग में विध्यांचल की पहाडि़यां हैं जिन्होंने भारत को दो भागों में विभाजित किया है। भारत के दक्षिणी तट पर दो पर्वत श्रृंखलाएं है जिन्हें भारत के पूर्वी घाट व पश्चिमी घाट कहते हैं।

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Lesson 7 भारत के पर्वत
बोधकथा 7

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https://youtu.be/g5nD0PBc4-Y

https://youtu.be/LGc50R6fvyA


Lesson 6 भारत की नदीयाँ



1. आदि शंकराचार्य

आदि शंकराचार्य अद्वैत वेदांत के प्रणेता प्रसिद्ध शैव आचार्य थे। उपनिषदों और वेदांतसूत्रों पर लिखी हुई इनकी टीकाएँ बहुत प्रसिद्ध हैं। इन्होंने भारतवर्ष में चार मठों की स्थापना की थी जो अभी तक बहुत प्रसिद्ध और पवित्र माने जाते हैं और जिनके प्रबंधक तथा गद्दी के अधिकारी 'शंकराचार्य' कहे जाते हैं। वे चारों स्थान ये हैं- (१) बदरिकाश्रम, (२) शृंगेरी पीठ, (३) द्वारिका पीठ और (४) शारदा पीठ। इन्होंने अनेक विधर्मियों को भी अपने धर्म में दीक्षित किया था। ये शंकर के अवतार माने जाते हैं। इन्होंने ब्रह्मसूत्रों की बड़ी ही विशद और रोचक व्याख्या की है।

2. भारत की नदीयाँ

भारत की नदियों का देश के आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास में प्राचीनकाल से ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सिन्धु तथा गंगा नदियों की घाटियों में ही विश्व की सर्वाधिक प्राचीन सभ्यताओं - सिन्धु घाटी तथा आर्य सभ्यता का आर्विभाव हुआ। आज भी देश की सर्वाधिक जनसंख्या एवं कृषि का संकेन्द्रण नदी घाटी क्षेत्रों में पाया जाता है। प्राचीन काल में व्यापारिक एवं यातायात की सुविधा के कारण देश के अधिकांश नगर नदियों के किनारे ही विकसित हुए थे तथा आज भी देश के लगभग सभी धार्मिक स्थल किसी न किसी नदी से सम्बद्ध है।


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1. आदि शंकराचार्य
2. भारत की नदीयाँ
3. बोध कथा

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https://youtu.be/LS-hZ6O-N54

https://youtu.be/P9jNiuEhoik


Lesson 5. भारतीय संस्कृति का परिचय

Lesson 5. भारतीय संस्कृति का परिचय
1. भारतीय संस्कृति का परिचय

भारत की सभ्यता और संस्कृति दुनिया में सबसे प्राचीनतम है. जब यूनान, मिस्र और रोम की सभ्यताएं मिट रही थी तब भारत की सभ्यता और संस्कृति फल-फूल रही थी. आज हम आपको रभात, भारतीयता, भारतीय संस्कृति और सभ्यता के बारे में कुछ खास बातें बतायेंगे. तो आइये इन तथ्यों को जानते हैं.

2. भारत के ये 30 मंदिर सुनाते हैं इतिहास, आस्था और वैभव की दास्तां
कहा जाता है कि भारत की भूमि विद्वानों की भूमि है, जिसके पीछे भारत का गौरवशाली इतिहास गवाह रहा है. चिकित्सा से ले कर विज्ञान के क्षेत्र में आगे होने के बावजूद यह देश कई मायनों में बाकी देशों से हटकर है जिसमें आस्था भी एक अहम भूमिका निभाती है, जो इस देश को इतनी विविधता होने के बावजूद एक धागे में बांधे रखता है.


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Lesson 5. भारतीय संस्कृति का परिचय
2. भारत के ये 30 मंदिर
3-बोधकथा

विडियो ....

https://youtu.be/P_gNSCFksvI

https://youtu.be/sAxWEakLLOE